Pura Duniya
world03 February 2026

Air India grounds Boeing 787 plane after pilot flags fuel control switch issue

Air India grounds Boeing 787 plane after pilot flags fuel control switch issue

विमानन के इस साल के सबसे बड़े झंझट में से एक फिर से चर्चा में आया है, जब एयर इंडिया ने एक Boeing 777 को ग्राउंड कर दिया और फिर DGCA ने बताया कि फ्यूल कंट्रोल स्विच में कोई फॉल्ट नहीं मिला। इस फैसले ने यात्रियों, एयर्सेवा प्रोफेशनल्स और उद्योग विशेषज्ञों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

एयर इंडिया की फ्लीट में Boeing 777-300ER एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का काम करता है। पिछले साल, उसी मॉडल की एक और विमान में फ्यूल लीक की शिकायत के बाद, कई रूट्स पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी। उस समय, कई रिपोर्ट्स ने कहा था कि फ्यूल कंट्रोल स्विच में इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी की संभावना है, जिससे पायलट को फ्यूल मैनेजमेंट में दिक्कत हो सकती है। इस कारण, एयर इंडिया ने तुरंत ही उस विमान को ग्राउंड कर दिया और DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एयरोनॉटिक्स) को जांच के लिए भेजा गया।

- कब: पिछले हफ्ते, दिल्ली‑लंदन रूट पर एक Boeing 777 ने टेकऑफ़ के बाद फ्यूल प्रेशर में असामान्य गिरावट दिखायी। - क्या हुआ: पायलट ने तुरंत एम्बार्गो प्रोटोकॉल फॉलो किया, और विमान को सुरक्षित रूप से लंदन में लैंड किया। लैंडिंग के बाद, फ्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर तकनीकी टीम ने विस्तृत जांच शुरू की। - जांच: DGCA ने 3 अलग‑अलग विशेषज्ञ पैनल को नियुक्त किया, जिन्होंने स्विच के हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और कनेक्टिविटी लॉग को 150 घंटे तक विश्लेषण किया।

परिणामस्वरूप, DGCA ने कहा कि “स्विच के इलेक्ट्रॉनिक घटकों में कोई दोष नहीं मिला, और सभी सॉफ्टवेयर वर्ज़न अपडेटेड हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि फ्यूल प्रेशर में गिरावट संभवतः अस्थायी सेंसर कैलीब्रेशन इश्यू या बाहरी तापमान परिवर्तन के कारण हो सकती है।

- सेन्सर कैलिब्रेशन: फ्यूल प्रेशर सेंसर को अक्सर तापमान और एयर प्रेशर के साथ री‑कैलिब्रेट करना पड़ता है। इस बार, तापमान में अचानक बदलाव ने सेंसर को गलत रीडिंग देने पर मजबूर किया। - सॉफ्टवेयर लॉग: सभी सॉफ्टवेयर लॉग क्लीन थे, और कोई अनऑथराइज़्ड मोडिफिकेशन नहीं मिला। - हाइड्रॉलिक सिस्टम: फ्यूल पंप और हाइड्रॉलिक लाइन्स में भी कोई लीक या ब्लॉक नहीं पाया गया।

इन निष्कर्षों के आधार पर, DGCA ने एयर इंडिया को विमान को फिर से ऑपरेट करने की अनुमति दी, बशर्ते कि अतिरिक्त प्री‑फ़्लाइट चेक्स लागू किए जाएँ।

क्यों है यह महत्वपूर्ण?

1. सुरक्षा का भरोसा: फ्यूल कंट्रोल सिस्टम किसी भी जेट के लिए हृदय की धड़कन जैसा होता है। अगर इसमें कोई समस्या हो, तो पूरी उड़ान जोखिम में पड़ सकती है। इस बार स्पष्ट हो गया कि समस्या तकनीकी नहीं बल्कि ऑपरेशनल थी, जिससे यात्रियों का भरोसा फिर से बनता है। 2. एयरलाइन की विश्वसनीयता: एयर इंडिया ने पिछले साल कई ग्राउंडिंग्स का सामना किया था, जिससे उसकी ऑन‑टाइम परफ़ॉर्मेंस पर असर पड़ा। इस फैसले से कंपनी को एक नई सिग्नल मिलती है कि वह तकनीकी रूप से तैयार है। 3. नियामक पारदर्शिता: DGCA ने पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया, जिससे इंडस्ट्री में पारदर्शिता का माहौल बनता है। यह अन्य एयर्सेवा प्रोवाइडर्स के लिए भी एक बेंचमार्क बन सकता है।

- अधिक प्री‑फ़्लाइट मॉनिटरिंग: एयर इंडिया ने घोषणा की है कि अब सभी Boeing 777 के फ्यूल सिस्टम को अतिरिक्त दो‑स्तरीय चेक्स से गुजरना पड़ेगा। इसमें रीयल‑टाइम सेंसर डेटा को क्लाउड पर अपलोड करके AI‑आधारित एनालिसिस भी शामिल है। - इंडस्ट्री‑वाइड सेंसिटिविटी: इस घटना के बाद, कई एशियाई एयरलाइंस ने अपने फ्यूल कंट्रोल मॉनिटरिंग प्रोटोकॉल को रिव्यू करने का इरादा जताया है। यह संभव है कि भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय नियामक बॉडीज भी इस दिशा में सख्त दिशा-निर्देश जारी करें। - टेक्नोलॉजी अपग्रेड: Boeing ने अभी तक कोई आधिकारिक अपडेट नहीं दिया है, पर उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए भविष्य में स्विच में अधिक रिडंडेंट सेंसर और स्व-डायग्नोस्टिक फीचर जोड़े जा सकते हैं। - ग्राहक विश्वास पुनर्स्थापित: एयर इंडिया के मार्केटिंग टीम ने कहा है कि वे “सुरक्षा प्रथम” अभियान को दोबारा लॉन्च करेंगे, जिसमें यात्रियों को नई प्री‑फ़्लाइट चेक्स और रीयल‑टाइम मॉनिटरिंग के बारे में जानकारी दी जाएगी।

- कॉस्ट इम्पैक्ट: अतिरिक्त चेक्स और AI‑बेस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम को लागू करने में लागत बढ़ेगी। छोटे एयरलाइंस के लिए यह एक बड़ा बोझ बन सकता है। - डेटा प्राइवेसी: रीयल‑टाइम डेटा को क्लाउड पर स्टोर करने से साइबर‑सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी के मुद्दे भी उठते हैं। नियामक बोर्ड को इन पहलुओं को भी सख्ती से देखना पड़ेगा। - इन्फ्रास्ट्रक्चर: भारत में कई छोटे हवाई अड्डे अभी भी पुराने फ्यूल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम पर चल रहे हैं। उन्हें अपग्रेड करने में समय और निवेश की जरूरत होगी।

DGCA की यह घोषणा कि फ्यूल कंट्रोल स्विच में कोई दोष नहीं मिला, सिर्फ एक तकनीकी रिपोर्ट नहीं है; यह भारतीय एयरोस्पेस सेक्टर में सुरक्षा, भरोसा और नियामक पारदर्शिता के नए मानक स्थापित कर रही है। एयर इंडिया जैसे बड़े प्लेयरों के लिए यह एक अवसर है कि वे अपने ऑपरेशन को और अधिक सख्त बना सकें, जबकि छोटे एयर्सेवा प्रोवाइडर्स को भी इस दिशा में कदम बढ़ाने की प्रेरणा मिल सकती है। अंततः, यात्रियों को सबसे बड़ी जीत मिलती है – एक सुरक्षित, भरोसेमंद और भरोसे के साथ उड़ान अनुभव।

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