Pura Duniya
world04 February 2026

Judge temporarily bans use of tear gas at protests near Portland ICE office

Judge temporarily bans use of tear gas at protests near Portland ICE office

अमेरिकी फाइटर जेट ने एक इरानी ड्रोन को मार गिराया, जब वह कैरियर समूह के करीब “अग्रेसिवली अप्रोचिंग” दिखा रहा था। इस घटना ने एशिया‑पैसिफिक में मौजूदा तनाव को फिर से उजागर कर दिया और नौसैनिक सुरक्षा के नए नियमों पर सवाल उठाए।

पृष्ठभूमि: क्षेत्र में बढ़ती जटिलताएँ

पिछले कुछ सालों में, इरान ने अपनी ड्रोन तकनीक को तेज़ी से विकसित किया है। छोटे क्वाडकॉप्टर से लेकर लंबी दूरी के हाई‑एंड UAV तक, अब वह समुद्री लक्ष्य पर भी निगरानी या हमला करने की क्षमता रखता है। वहीं, यू.एस. नौसेना अपने एशिया‑पैसिफिक फ्लोटिंग बेस, विशेषकर Nimitz‑क्लास एअरक्राफ्ट कैरियर्स, को “फ्लोटिंग डिटेंशन” के रूप में इस्तेमाल करती है, जिससे वह इंडो‑पैसिफिक में अपनी शक्ति दिखा सके।

इन दोनों के बीच का “डिजिटल‑डॉमिनेंस” की दौड़, अक्सर समुद्री सीमाओं के पास छोटे‑छोटे झगड़े में बदल जाती है। इस माह में, इरान ने पहले भी कई बार अमेरिकी जहाज़ों को “संदेहास्पद” व्यवहार करने का आरोप लगाया था, लेकिन इस बार ड्रोन का वास्तविक निकटतम संपर्क हुआ।

एक अमेरिकी F‑18 सुपरहॉर्न, जो कैरियर समूह के साथ पावर प्रोटेक्शन ज़ोन में था, ने इरानी क्वाड‑कोप्टर को रडार पर पहचान लिया। ड्रोन ने 5‑6 किलोमीटर के भीतर प्रवेश किया और लगातार “अग्रेसिवली अप्रोचिंग” संकेत भेजता रहा।

पायलट ने तुरंत “रूल ऑफ एंगेजमेंट” (ROE) के तहत चेतावनी संकेत भेजे—आकाश में लाल‑हरा‑लाल फ्लैश, फिर आवाज़ी अलर्ट। ड्रोन ने इन संकेतों को इग्नोर कर दिया, और उसकी गति बढ़ी। 30 सेकंड के भीतर, सुपरहॉर्न ने AIM‑9X साइडविंड मिसाइल लॉन्च की, जिससे ड्रोन हवा में ध्वस्त हो गया।

सुरक्षा टीम ने तुरंत पुष्टि की कि कोई क्षति या चोट नहीं हुई, और कैरियर समूह ने अपनी सामान्य ऑपरेशन जारी रखी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना

1. ड्रोन के खिलाफ पहली सक्रिय प्रतिक्रिया अमेरिका ने पहले भी “इंटेलिजेंट इंटरेक्शन” के तहत ड्रोन को चेतावनी दी थी, लेकिन इस बार सीधे शॉट फायर करना पहली बार है जब एक अमेरिकी लड़ाकू विमान ने समुद्री क्षेत्र में इरानी UAV को मार गिराया। यह संकेत देता है कि अब “ड्रोन‑डिटेक्ट‑एंड‑डिस्ट्रॉय” प्रोटोकॉल को वास्तविक ऑपरेशन में लागू किया जा रहा है।

2. क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर असर इंडो‑पैसिफिक में कई देश, जैसे भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान, अमेरिकी कैरियर्स के साथ मिलकर अभ्यास करते हैं। अगर इरान ऐसे ड्रोन को लगातार “अग्रेसिव” मानता रहेगा, तो इन देशों को भी अपनी एंटी‑ड्रोन क्षमताओं को तेज़ी से अपडेट करना पड़ेगा।

3. कूटनीतिक तनाव का नया मोड़ इंटरनैशनल मीडिया में इस घटना को “इंक्रीज़िंग एस्केलेशन” के रूप में पेश किया गया है, जिससे दोनों देशों के बीच मौजूदा कूटनीतिक वार्तालापों पर दबाव बढ़ सकता है। इरान ने पहले ही इस कार्रवाई को “अवांछित आक्रमण” कहकर निंदा की है, और अगले हफ्तों में अपनी विदेश मंत्रालय से एक मजबूत प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही है।

रूल ऑफ एंगेजमेंट में बदलाव अब अमेरिकी नौसेना को “ड्रोन‑एंगेजमेंट” के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाना पड़ेगा। अगर ड्रोन को “अग्रेसिव” माना जाता है, तो क्या पहले चेतावनी देना अनिवार्य होगा, या तुरंत मार गिराना ही मानक बन जाएगा? इस पर अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून के विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं।

इंटर‑एलीट प्रौद्योगिकी की दौड़ इरान की ड्रोन तकनीक में सुधार जारी रहेगा, और अन्य मध्य‑पूर्वी देशों भी समान UAV क्षमताओं को विकसित करेंगे। इस स्थिति में, अमेरिका को अपने “एयर‑टू‑एयर” और “सर्फेस‑टू‑एयर” एंटी‑ड्रोन सिस्टम, जैसे कि रडार‑फ्यूज़्ड लेज़र या इलेक्ट्रॉनिक जामर, को तेज़ी से फील्ड में लाना पड़ेगा।

डिप्लोमैटिक चैनल का उपयोग वर्तमान में, दोनों पक्षों के बीच कई “बैक‑चैनल” वार्तालाप चल रहे हैं। इस घटना के बाद, संयुक्त राष्ट्र समुद्री सुरक्षा परिषद में भी इस मुद्दे को उठाने की संभावना है, जहाँ इरान को “ड्रोन‑प्रोवोकेशन” के लिए दंडित करने की बात सामने आ सकती है।

नाविक सुरक्षा विश्लेषक रवीना सिंह कहती हैं, “यह घटना एक ‘ट्रिगर पॉइंट’ हो सकती है। अगर दोनों पक्ष तुरंत डिप्लोमैटिक समाधान नहीं निकाल पाते, तो छोटे‑छोटे स्केलेबल टकराव बड़े युद्ध में बदल सकते हैं।”

इंस्टिट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के प्रोफेसर अली हसन ने बताया, “इरान के लिए ड्रोन एक सस्ते, लचीले हथियार हैं। उनका लक्ष्य अमेरिकी नौसैनिक शक्ति को ‘कंटेनमेंट’ की भावना देना है, न कि सीधे युद्ध करना। इसलिए, यू.एस. को इन UAVs को ‘डिटेक्ट‑एंड‑डिसरप्ट’ करने की रणनीति विकसित करनी होगी, बिना व्यापक सैन्य प्रतिक्रिया के।”

निष्कर्ष: सतर्कता और संवाद की जरूरत

अमेरिकी जेट द्वारा ड्रोन को मार गिराना, सिर्फ एक तकनीकी जीत नहीं है; यह एक संकेत है कि समुद्री क्षेत्र में “ड्रोन‑डायरेक्ट कॉन्फ्लिक्ट” की संभावना बढ़ रही है। इस स्थिति में, दोनों देशों को अपने सैन्य नियमों को स्पष्ट करना, अंतर्राष्ट्रीय कानूनी ढांचे के भीतर कार्य करना, और कूटनीतिक संवाद को तेज़ी से पुनर्जीवित करना आवश्यक है।

यदि सही दिशा में कदम उठाए जाएँ, तो इस तरह की घटनाएँ भविष्य में “ड्रोन‑स्क्रिप्टेड” टकरावों को रोक सकती हैं और एशिया‑पैसिफिक की स्थिरता को बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती हैं। अभी के लिए, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण क्षण पर टिकी हैं, जहाँ एक फाइटर जेट ने “अग्रेसिव” ड्रोन को रोक कर संभावित बड़े संघर्ष को टाल दिया।