Manipur gets another BJP CM: Y Khemchand Singh sworn in after one year of President's rule
बुजुर्गों की बड़ाई, युवा वर्ग की उम्मीदें और राजनैतिक समीकरणों की नई परतें एक साथ मिलकर आज के मंच को तैयार कर रही हैं। एक साल तक चलती राष्ट्रपति शासन के बाद, मणिपुर में फिर से मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले यु. खेमचंद सिंह ने आज शपथ ली, जिससे राज्य में राजनीतिक स्थिरता की नई लहर शुरू होने की संभावना दिख रही है।
2024‑25 के चुनावी चक्र में मणिपुर की राजनीति कई बार धूमिल हो गई थी। गठबंधन सरकार के भीतर असंतोष, एथनिक टेंशन और प्रशासनिक अड़चनें एक साथ मिलकर सरकार को अस्थिर कर रही थीं। अंततः, मुख्यमंत्री पद खाली होने पर राष्ट्रपति ने राज्य पर सीधे शासन लागू कर दिया। इस दौरान, प्रशासनिक कार्यवाही को केंद्र सरकार की नज़र से चलाया गया, लेकिन जनता की असंतुष्टि बढ़ती गई।
राष्ट्रपति शासन का अंत
राष्ट्रपति शासन की अवधि के दौरान, कई बुनियादी योजनाओं की प्रगति धीमी रही। स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में कई प्रोजेक्ट्स ठहर गए थे। केंद्रीय सरकार ने इस अवधि को “सुधार का अवसर” कहा, लेकिन असली चुनौती थी जनता को फिर से भरोसा दिलाना। इस कारण, 2025 के मध्य में नई विधानसभा चुनावों की घोषणा की गई, और भाजपा ने इस अवसर को अपने पक्ष में मोड़ने की तैयारी की।
- स्थान और माहौल: राजभवन के बड़े हॉल में, राज्यपाल के साथ कई केंद्रीय और राज्य स्तर के नेता उपस्थित थे। - शपथ का पाठ: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत, खेमचंद सिंह ने शपथ ली और “सच्ची, निष्पक्ष और पारदर्शी शासन” का वादा किया। - मुख्य अतिथि: केंद्रीय गृह मंत्री और कई भाजपा वरिष्ठ नेता ने समारोह में भाग लेकर इस नई सरकार को समर्थन दिया।
शपथ के बाद, खेमचंद सिंह ने संक्षिप्त भाषण दिया, जिसमें उन्होंने “एकजुटता, विकास और सुरक्षा” को प्राथमिकता देने का इरादा जताया।
क्यों है यह मायने रखता?
- स्थिरता की ओर पहला कदम: एक साल की राष्ट्रपति शासन के बाद, राज्य में फिर से एक निर्वाचित सरकार का होना सामाजिक शांति के लिए महत्वपूर्ण है। - एथनिक टेंशन को कम करने की संभावना: नई सरकार ने कहा है कि वह सभी समुदायों के साथ संवाद स्थापित करके संघर्षों को हल करेगी। - बुनियादी ढाँचे की गति: पिछले साल के ठहराव को देखते हुए, नई सरकार के पास कई लम्बित प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू करने का अवसर है। - भर्ती और रोजगार: युवा वर्ग के लिए नई नौकरियों और स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम्स का वादा किया गया है, जो बेरोजगारी की समस्या को घटा सकता है।
मुख्य वादे और प्राथमिकताएँ
- इन्फ्रास्ट्रक्चर: - 5,000 किमी सड़कों का पुनर्निर्माण और नई हाइवे परियोजनाओं की शुरुआत। - ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति और बिजली की पहुँच बढ़ाना।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: - प्रत्येक जिले में एक नया मेडिकल कॉलेज खोलना। - सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम का कार्यान्वयन।
- सुरक्षा और शांति: - विशेष सुरक्षा बलों की पुनर्संरचना और स्थानीय पुलिस के प्रशिक्षण पर ध्यान। - एथनिक समूहों के बीच सामुदायिक संवाद मंच स्थापित करना।
- कृषि और उद्योग: - छोटे किसान के लिए सब्सिडी और आधुनिक खेती तकनीकें। - हाइड्रोपोनिक और एग्रो‑टूरिज़्म को प्रोत्साहन देना।
इन बिंदुओं को लेकर खेमचंद सिंह ने कहा, “हमारी सरकार का लक्ष्य सिर्फ चुनाव जीतना नहीं, बल्कि हर नागरिक को विकास की भावना देना है।”
नई सरकार के सामने कई चुनौतियाँ हैं, पर अवसर भी उतने ही बड़े हैं। यदि खेमचंद सिंह अपने वादों को समय पर लागू कर पाते हैं, तो मणिपुर में आर्थिक विकास की गति तेज़ हो सकती है। इससे न केवल स्थानीय उद्योगों को लाभ होगा, बल्कि राज्य के पर्यटन सेक्टर में भी नई ऊर्जा आएगी।
साथ ही, एथनिक टेंशन को कम करने के लिए किए जाने वाले संवादात्मक प्रयासों का असर पड़ोसी राज्यों और राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा। यदि शांति स्थापित हो जाती है, तो मणिपुर को एक रणनीतिक कनेक्शन पॉइंट के रूप में देखा जा सकता है, जिससे भारत‑चीन सीमा के मुद्दों में भी स्थिरता आ सकती है।
परन्तु, विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक समूहों ने अभी भी नई सरकार के प्रति सतर्कता जताई है। वे चाहते हैं कि वादे केवल कागज़ पर न रहें, बल्कि जमीन पर ठोस परिणाम दिखें। इस संदर्भ में, राज्यपाल, उच्च न्यायालय और केंद्र सरकार की निगरानी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
समग्र रूप से, खेमचंद सिंह की शपथ मणिपुर के लिए एक नया अध्याय खोलती है। यदि यह अध्याय विकास, शांति और सामाजिक समावेश के सिद्धांतों पर आधारित रहे, तो राज्य की भविष्य की तस्वीर उज्ज्वल दिखेगी।
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