MCC releases NEET PG round 3 seat allotment, reporting schedule and instructions announced

NEET की इस साल की एंट्री प्रक्रिया ने छात्रों, कोचिंग सेंटर और नीति निर्माताओं के बीच नई चर्चा छेड़ दी है। हजारों aspirants ने ऑनलाइन पोर्टल पर अपना आवेदन जमा किया, लेकिन कुछ तकनीकी गड़बड़ियों और नियमों में बदलाव ने इस प्रक्रिया को पहले से अधिक जटिल बना दिया। इस लेख में हम समझेंगे कि क्या हुआ, क्यों यह महत्वपूर्ण है और आगे क्या हो सकता है।
पृष्ठभूमि: NEET का evolution
NEET, या National Eligibility cum Entrance Test, भारत में मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश का मुख्य द्वार है। पिछले कुछ वर्षों में इस परीक्षा को कई बार रिफॉर्म किया गया है:
- 2020‑2022: ऑनलाइन आवेदन और पेमेंट सिस्टम पूरी तरह से डिजिटल किया गया। - 2023: परीक्षा पैटर्न में 180 प्रश्नों से बढ़ाकर 200 किया गया, जिससे स्कोरिंग में बदलाव आया। - 2024: कुछ राज्य ने अपना अलग कट‑ऑफ रखकर NEET को ‘सिंगल विंडो’ मॉडल में बदलने की बात उठाई।
इन बदलावों ने छात्रों को नई तैयारी रणनीतियों के साथ-साथ प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कराया। इस साल की प्रक्रिया में भी कई नई चीज़ें शामिल की गईं, जो अब चर्चा का विषय बन गई हैं।
1. आवेदन पोर्टल का री‑डिज़ाइन इस साल NEET की आधिकारिक वेबसाइट को पूरी तरह से रीडिज़ाइन किया गया। नई UI में “One‑Click Verification” और “Real‑Time Document Upload” जैसी सुविधाएँ जोड़ी गईं। लेकिन लॉन्च के पहले ही कई छात्रों ने बताया कि फॉर्म भरते समय “Server Overload” और “Session Timeout” की समस्या आई।
2. नियमों में बदलाव - आधार कार्ड का लिंक: अब सभी उम्मीदवारों को अपने आधार को NEET पोर्टल से लिंक करना अनिवार्य कर दिया गया। इससे पहले यह वैकल्पिक था। - ड्रॉपडाउन में नई विकल्प: ‘Other’ के तहत अब “Transgender” और “Non‑Resident Indian (NRI)” विकल्प जोड़े गए, जिससे अधिक समावेशिता की उम्मीद है। - फीस में वृद्धि: सामान्य वर्ग के लिए आवेदन शुल्क ₹1,500 से बढ़कर ₹1,800 कर दिया गया, जबकि OBC/SC/ST के लिए ₹1,200 रखा गया।
3. तकनीकी गड़बड़ी परीक्षा के आवेदन खोलने के दो घंटे बाद पोर्टल पर 2‑घंटे की “downtime” रिपोर्ट की गई। इस दौरान 30,000 से अधिक छात्रों ने अपना डेटा री‑एंटर किया, जिससे कई बार डुप्लिकेट एंट्री बन गई। NTA (National Testing Agency) ने तुरंत एक “Emergency Patch” जारी किया, पर कुछ छात्रों का आवेदन अभी भी “Pending” दिख रहा है।
4. संकट प्रबंधन NTA ने एक हेल्पलाइन नंबर और WhatsApp बॉट लॉन्च किया, जहाँ छात्र अपनी समस्या दर्ज कर सकते थे। लेकिन हेल्पलाइन पर कॉल वॉल्यूम बहुत अधिक था, और कई बार “Please try again later” का संदेश आया।
क्यों है यह मायने रखता?
- छात्रों की मानसिक तनाव: NEET की तैयारी पहले ही बहुत तनावपूर्ण होती है। आवेदन प्रक्रिया में तकनीकी समस्याएँ और अतिरिक्त दस्तावेज़ों की माँग ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। कई छात्रों ने कहा कि “अभी तक मैं अपना आवेदन पूरा नहीं कर पाया, तो पढ़ाई पर फोकस कैसे रखूँ?”
- समानता और समावेशिता: आधार लिंक को अनिवार्य बनाने से डिजिटल डिवाइड का सवाल उठता है। ग्रामीण या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के पास आधार अपडेट करने के लिए सुविधाएँ नहीं हो सकतीं। वहीं, ट्रांसजेंडर और NRI विकल्प जोड़ना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके लिए उचित जागरूकता और समर्थन की जरूरत है।
- प्रशासनिक भरोसा: NTA पर भरोसा बनाना अब एक चुनौती बन गया है। बार-बार तकनीकी गड़बड़ियों से यह सवाल उठता है कि क्या भविष्य में भी ऐसी समस्याएँ नहीं होंगी, खासकर जब परीक्षा ऑनलाइन मोड में भी हो सकती है।
- शिक्षा नीति पर प्रभाव: यह घटना नीति निर्माताओं को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को कैसे मजबूत किया जाए और सभी वर्गों के लिए समान अवसर कैसे सुनिश्चित किया जाए।
आगे क्या हो सकता है? संभावित दिशा‑निर्देश
- इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड: NTA को क्लाउड‑बेस्ड सर्वर और लोड‑बैलेंसिंग तकनीक अपनानी चाहिए, ताकि एक साथ लाखों उपयोगकर्ताओं को संभाल सके।
- डिजिटल साक्षरता अभियान: राज्य और केंद्र स्तर पर एक व्यापक डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम चलाया जा सकता है, जिससे छात्रों को आधार अपडेट, दस्तावेज़ अपलोड आदि में मदद मिल सके।
- फी में स्लाइडिंग स्केल: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आवेदन शुल्क को स्लाइडिंग स्केल पर लाना एक विकल्प हो सकता है, जिससे वित्तीय बोझ कम हो।
- सपोर्ट सिस्टम को सशक्त बनाना: हेल्पलाइन के साथ AI‑आधारित चैटबॉट को इंटीग्रेट किया जा सकता है, जिससे रियल‑टाइम समाधान मिल सके।
- पारदर्शी टाइमलाइन: आवेदन के विभिन्न चरणों (भरण, सत्यापन, भुगतान) के लिए स्पष्ट टाइमलाइन और रिमाइंडर सेट किए जाएँ, जिससे छात्रों को अनिश्चितता कम हो।
इन कदमों से न केवल इस साल की समस्याएँ हल होंगी, बल्कि भविष्य में NEET को एक भरोसेमंद और समावेशी प्रवेश द्वार बनाने में मदद मिलेगी।
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